अपने शरीर की तासीर को जानें – असली पहचान की ओर पहला कदम
हम सभी का शरीर एक जैसा नहीं होता। कोई ठंड जल्दी महसूस करता है, तो कोई गर्मी से परेशान रहता है। किसी को बार-बार सर्दी-जुकाम होता है, तो कोई जल्दी गुस्सा करता है। इन सभी अंतर के पीछे है हमारी “शरीर की तासीर” (Body Nature) — जो बताती है कि हमारा शरीर वात, पित्त या कफ में से किस दोष से अधिक प्रभावित है।
आयुर्वेद के अनुसार, हर व्यक्ति की प्रकृति जन्म से तय होती है, और उसे समझना जीवनभर स्वस्थ रहने की कुंजी है।
ऋतु और जन्म माह से तासीर का संबंध
आयुर्वेद में कहा गया है कि मौसम का असर हमारे शरीर के दोषों पर सीधे पड़ता है। इसीलिए, जन्म माह और ऋतु से तासीर का कुछ अनुमान लगाया जा सकता है —
- जनवरी–फरवरी (शिशिर ऋतु): वात प्रधान
- मार्च–अप्रैल (वसंत ऋतु): कफ-पित्त मिश्रित
- मई–जून (ग्रीष्म ऋतु): पित्त प्रधान
- जुलाई–अगस्त (वर्षा ऋतु): पित्त-कफ मिश्रित
- सितंबर–अक्टूबर (शरद ऋतु): पित्त प्रधान
- नवंबर–दिसंबर (हेमंत ऋतु): कफ-वात मिश्रित
यह विभाजन एक सामान्य संकेत है, लेकिन हर व्यक्ति की व्यक्तिगत तासीर इससे अलग भी हो सकती है, क्योंकि यह माता-पिता की प्रकृति, गर्भकालीन आहार और पर्यावरण पर निर्भर करती है।
विशेषज्ञ की राय – Body Nature और स्वास्थ्य का संबंध
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आप अपनी Body Nature को समझ लें, तो आप अपने लिए सही भोजन, मौसम और जीवनशैली चुन सकते हैं।
“जब व्यक्ति अपनी प्रकृति के अनुसार आहार और दिनचर्या अपनाता है, तो रोग स्वतः दूर रहते हैं।”
— डॉ. हरिदेव शर्मा, आयुर्वेदाचार्य
कैसे पहचानें आपकी तासीर – आसान टेस्ट घर पर
आप अपनी Body Nature को निम्न संकेतों से पहचान सकते हैं –
1. वात प्रधान व्यक्ति
- शरीर दुबला, त्वचा रूखी, ठंड असहनीय
- नींद हल्की, आवाज़ ऊँची
- सोच रचनात्मक, पर अस्थिर
2. पित्त प्रधान व्यक्ति
- चेहरा लालिमा लिए हुए, पसीना ज़्यादा
- भूख तीव्र, पाचन अच्छा
- गुस्सा जल्दी आता है
3. कफ प्रधान व्यक्ति
- शरीर भारी, आलस्य की प्रवृत्ति
- नींद गहरी, सोचने में समय लेते हैं
- स्वभाव शांत, पर धीमा
सही तासीर पहचानने के फायदे
- आहार चयन में सुविधा
- मौसमी बीमारियों से बचाव
- मानसिक स्थिरता और बेहतर पाचन
- ऊर्जा और एकाग्रता में वृद्धि
अपने शरीर की तासीर जानने का सरल उपाय
कई लोग तासीर पहचानने के लिए ऋतु और जन्म माह पर निर्भर रहते हैं, पर यह केवल एक संकेत है। असली पहचान तब होती है जब आप अपनी आदतों, त्वचा, नींद, प्यास और स्वभाव का अवलोकन करें।
👉 जो व्यक्ति ठंड में असहज और गरम चीज़ों से राहत महसूस करता है — उसकी तासीर वात हो सकती है।
👉 जो हमेशा गर्मी से परेशान और ठंडी चीज़ें पसंद करता है — पित्त प्रधान होता है।
👉 जो ठंडे और नम मौसम में सुस्त हो जाता है — कफ प्रधान होता है।
यही आपका असली उत्तर है, और यही आपके जीवन की स्वास्थ्य दिशा तय करता है।
निष्कर्ष
अपने शरीर की तासीर पहचानना किसी इलाज से कम नहीं है। जब आप अपनी Body Nature को समझते हैं, तो आप बीमारियों से पहले ही बच सकते हैं।
आज से ही अपने शरीर की बात सुनना शुरू करें — वही आपको सबसे सच्चा जवाब देगा।
अगला कदम: अपने नज़दीकी आयुर्वेद विशेषज्ञ से प्रकृति परीक्षण (Prakriti Analysis) करवाएं और अपनी जीवनशैली को उसी अनुसार ढालें।
Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए आयुर्वेद विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लें।
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